नरेंद्र मोदी की तीन कविताएँ

(ए जर्नी ः पोएम्स बाइ नरेंद्र मोदी/प्रकाशक ः रुपा. गुजराती से अंग्रेज़ी अनुवाद ः रवि मंथा) अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद ः प्रकाश कुमार रे.  

आज
—-

था, है, बीता, वर्तमान
यहाँ, वहाँ, अभी, आगत
यह सब रिक्तता है,
एक विशाल स्तंभ है,
खंडहरों के बीच!

राहों में हम भटकते हैं भ्रमित,
किसी अनुप्राणित शव की तरह नहीं,
बस अपनी परछाईं मात्र.
बीता हुआ मानो
आत्मा हर ली हो प्रेतों की छायाओं ने.

और जबकि आत्मा अमर्त्य है,
हम इसी शरीर में तलाशते हैं अमरता.

तरसते हैं हम कल अमर होने के लिए,
पकड़े हुए बीते हुए कल के मोह
और आज के विश्वासघातों को.

क्या कोई अर्थ है इस तरह के जीवन में?

-*-

प्रेम के लिए एक कविता
———————

जिस पल मुझे तुम्हारा अहसास हुआmodi
मेरे मन के प्रशांत हिमालयी वन में
एक दावानल उठा, प्रचंड आवेग से.

जब मैंने तुम्हें देखा
पूनम का चाँद उगा मेरे मन की आँखों में
खिले हुए चंदन के पेड़ की महक
और जब हम आखिरकार मिले,
मेरे होने का हर रोम-कूप भर गया तुलनातीत सुगंध से.
हमारे वियोग ने पिघला दिये मेरे आनंद के शिखर.
सुगंध परिवर्तित हो गयी झुलसा देनेवाली गर्मी में,
जो जलाती है मेरा शरीर,
राख में बदल देती है मेरे सपनों को.

दूर तट पर पूनम का चाँद
निष्ठुरता से देखता है मेरी दूर्दशा.

बिना तुम्हारे कोमल सानिध्य के
मेरे जीवन के जलयान पर
कोई कप्तान नहीं, कोई पतवार नहीं.

-**-

धन्य हैं ये आँखें
————–

इस सुनहरी धरती को निहारना,
इन आँखों को मिला वरदान है!
इस घास पर पसरती है धूप.
हरी किरणें छूती हैं मेरी आँखों को,
पर ठहरती नहीं.

दीप्तिमान आकाश दमकता है आशिर्वाद में,
इस सुनहरी धरती को निहारते हुए!
देखता हूँ इस इंद्रधनुष को, फूलों का एक गुलदस्ता
रंगों की एक चमकीली अँगूठी,
ऊँचे आकाश में!
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पूर्व जन्मों के पुण्य कर्मों के फल
अभिभूत करते हैं मेरी इंद्रियों को,
जब मैं ऊपर देखता हूँ.
समुद्र भी आकाश में हो उठता है पुनर्जीवित.
इस बीच, कौन-सी कथाएँ छुपाते हैं ये मेघ?
आह्लाद से भर जाती है मेरे हृदय की रिक्तता
जब मैं निहारता हूँ इस सुनहरी धरती को.

अतुल्य और सत्य है मेरे लोगों के लिए
मेरा नेह
तब भी,
दूसरों की आँखों से ही जान सकता हूँ
मैं स्वयं को.
थाह नहीं लगा सकती कोई भी आँख
सचमुच उस रहस्य का, अस्तित्व का.
तब भी, मेरी आँखें सचमुच धन्य हैं
जो निहारती हैं इस सुनहरी धरती को.

-***-

(ए जर्नी ः पोएम्स बाइ नरेंद्र मोदी/प्रकाशक ः रुपा. गुजराती से अंग्रेज़ी अनुवाद ः रवि मंथा) अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद ः प्रकाश कुमार रे.  

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One thought on “नरेंद्र मोदी की तीन कविताएँ

  1. बधाई! अगला साहित्य अकादमी और भारतीय ज्ञानपीठ तय समझिए। इससे समकालीन कविता और कवियों की हैसियत का पता चलता है क्योंकि कविता करना अब खेल सा हो गया है। आप कुछ नहीं कर सकते तो कविता कर लीजिए। अच्छा काम है। सब करते हैं, निजाम साहब ने भी किया, अच्छा ही किया। वैसे कविता से ज्यादा आत्मकथ्य है यह। वह भी एक…

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