UID Card/आधार पहचान पत्र ख़तरनाक है

दस-बारह लाख रुपये में विदेशों में चमकेगी हिन्दुस्तान की इमेज

प्रकाश के रे बरगद के संपादक है.

बिना डॉक्युमेंट्री फिल्मों के देश उस परिवार की तरह है जिसके पास फोटो एल्बम नहीं हो.

-पैत्रिसियो गुज़मान, फिल्मकार.

लोगों को निष्क्रिय और आज्ञाकारी बनाये रखने का चालाक तरीका यह है कि स्वीकार्य विचारों का दायरा कठोरता से संकुचित कर दिया जाये, लेकिन उस दायरे में खुली बहस के लिए अनुमति हो.

- नोम चोमस्की, चिन्तक.

‘यह कुफ्र हमारे समयों में होना था’ का मलाल लिए पाश को गुज़रे चौथाई सदी का वक़्त हो चला है. वह कवि आज होता तो शायद यह कहता कि इस अश्लीलता से बेशर्म को बेपर्द होते हमें ही देखना था. कुछ दिनों पहले हमने देखा किस तरह कई पत्रकार बेहद बेईमान कंपनियों द्वारा प्रायोजित पुरस्कार लेने के लिए कतार में लगे थे. आजकल साहित्य के नाम पर लगे एक चर्चित मेले में दुनिया की सबसे खूंखार कॉर्पोरेटों द्वारा फेंके गए चाँद सिक्कों के बदले बड़े-बड़े लेखक-विचारक गाल बजा रहे हैं. इसी कड़ी में फिल्म बनाने के लिए धन देनेवाले एक ट्रस्ट ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के लिए देश के बाहर देश की छवि बेहतर बनाने के लिए डॉक्युमेंट्री बनाने के लिए आवेदन आमंत्रित किये हैं. इस पर विस्तार में जाने से पहले यह साफ़ कर देना ज़रूरी है कि मुझे किसी के किसी-तरह से पैसा या पुरस्कार कमाने पर कोई आपत्ति नहीं है. मुझे आपत्ति इस बात से है कि ऐसा पत्रकारिता, साहित्य, कला आदि के पवित्र दावों की आड़ में किया जा रहा है. पत्रकारिता और साहित्य को जनहित का काम कह कर इनसे सम्बंधित संस्थाएं और लोग सरकार से कई तरह की सहूलियतें पाते हैं जिनका भुगतान अंततः जनता करती है. इसलिए जब किसी को लगता है कि बड़ी-बड़ी बातों के पीछे बेईमानी की जा रही है तो चुप रहना मुश्किल हो जाता है. इसी वज़ह से पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग ट्रस्ट (पी एस बी टी) द्वारा विदेश मंत्रालय के लिए फिल्म बनाने के लिए मांगे गए आवेदन के बारे में कुछ सवाल उठाना ज़रूरी हो जाता है. अब आदर्शवादी सिनिसिज़्म का कोई मतलब नहीं है, यह समय क्रुद्ध होने का है. Continue reading

Rafiq Zakaria’s Letter to Salman Rushdie on Satanic Verses

We are republishing two letters- one, written to Rajiv Gandhi, then Prime Minister of India by Salman Rushdie (published in NY Times on October 19, 1988), and second, a response to Rushdie from Rafiq Zakaria, a well known Islamic scholar and a congressman defending the  (published in Illustrated Weekly Of India on October 23, 1988). These letters are very important today as we debate about Rushdie’s ‘forced’ or ‘schemed’ absence from Jaipur Lierature Festival and his novel, The Satanic Verse, still banned in India and in many countries. -Editor Continue reading

Salman Rushdie’s Letter to Rajiv Gandhi

We are republishing two letters- one, written to Rajiv Gandhi, then Prime Minister of India by Salman Rushdie (published in NY Times on October 19, 1988), and second, a response to Rushdie from Rafiq Zakaria, a well known Islamic scholar and a congressman defending the  (published in Illustrated Weekly Of India on October 23, 1988). These letters are very important today as we debate about Rushdie’s ‘forced’ or ‘schemed’ absence from Jaipur Lierature Festival and his novel, The Satanic Verse, still banned in India and in many countries. -Editor Continue reading

What’s going on in Nigeria?

Senior broadcast journalist Barnaby Phillips works for Al Jazeera.

Barnaby Phillips

I bumped into an old friend at a book launch in London recently. She used to be a senior British diplomat, and is still involved in African affairs. The conversation quickly turned to Nigeria, a country that we are both passionate about, and that we visit regularly. Continue reading

कॉरपोरेट प्रायोजित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के खिलाफ एक अपील

पिछले साल की तरह इस साल भी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजकों और प्रतिभागियों ने बरबाद हो रहे पर्यावरण, मानवाधिकारों के घिनौने उल्लंघन और इस आयोजन के कई प्रायोजकों द्वारा अंजाम दिए जा रहे भ्रष्टाचार के प्रति निंदनीय उदासीनता दिखाई है। 2011 में जब इन बातों पर चिंता व्यक्त करते हुए बयान दिए गए, तब फेस्टिवल-निदेशकों ने कहा था कि पहले किसी ने इस ओर हमारा ध्यान नहीं दिलाया था और अगर ये तथ्य सामने लाये जायेंगे तब हम ज़रूर उन पर ध्यान देंगे, लेकिन 2012 में भी उन्होंने ऐसा नहीं किया। Continue reading