इज़रायल की बर्बरता

हालाँकि इस हमले ने ग़ाज़ा की नाकेबंदी और फलस्तीन की आज़ादी के सवाल को एक बार फिर दुनिया के सामने रख दिया है, लेकिन यह चिंता भी स्वाभाविक है कि पिछली घटनाओं की तरह यह मामला भी निंदा और दुःख प्रकट करने तक ही सीमित रह जायेगा. हमें यह समझना होगा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, ख़ासकर अमरीका, यूरोप, चीन आदि की चुप्पी ने ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को नाकेबंदी तोड़ते हुए ग़ाज़ा पहुँचने की कोशिश के लिये मजबूर किया है.

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