South Africa: FIFA forbids free speech at World Cup

by Patrick Bond July 7, 2010/ http://links.org.au/node/1779   Acting against our alleged “ambush marketing” and “incitement” (sic), the South African Police Service, newly augmented with 40,000 additional cadre for the World Cup, detained… Continue reading

देश मेरा रंगरेज ए बाबू …..रंग-रंगीला परजातंतर

पीपली लाईव पर कुछ बात, तस्वीरें और टीज़र बहुत बहुत दिनों के बाद ऐसी कोई फ़िल्म आ रही है जिसका इंतज़ार इतनी बेसब्री से मैं कर रहा हूँ. यह फ़िल्म है ‘पीपली लाईव’. मुझे… Continue reading

बी आर चोपड़ा का सफ़र/ भाग एक

वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज के ब्लॉग के लिये मैं बी आर चोपड़ा पर एक सिरीज़ लिख रहा हूँ. प्रस्तुत है उसकी पहली कड़ी: http://chavannichap.blogspot.com/ बम्बईया सिनेमा को देश के सांस्कृतिक जीवन में… Continue reading

लाहौर वाले दाता गंज बख्श

प्रकाश के रे बरगद के संपादक हैं. लाहौर के दाता गंज बख्श के पवित्र मज़ार में गुरुवार देर शाम हुए दो फ़िदायीन हमले में कम-से-कम ४० लोग मारे गए हैं और २०० से अधिक… Continue reading

प्रेम के विरुद्ध खड़ी सभ्यता को संबोधित एक कविता

मुंगेर (बिहार) में 1948 में जन्मे आलोक धन्वा सत्तर के दशक में चर्चा में आए. ’जनता का आदमी’, ’गोली दागो पोस्टर’, ’कपड़े के जूते’ और ’ब्रूनों की बेटियाँ’ प्रसिद्ध कविताएँ. ‘दुनिया रोज बनती… Continue reading

Learning from Bhopal

-D.Raghunandan (Delhi Science Forum) http://newsclick.in The Bhopal verdict has exposed the soft ugly underbelly of the entire Indian judicial, regulatory, administrative and corporate governance systems, not to mention the scandalous behaviour of the… Continue reading

Saving democracy from the corporate veil

Five things the US should do to quell the global outrage after the recent verdict in the Bhopal gas leak case and provide some justice to the victims. –Gopal Krishna, Convenor, ToxicsWatch Alliance… Continue reading

कहे कबीर का कीजै

पुस्तक समीक्षा –प्रकाश कुमार राय (दैनिक भास्कर में 26 जून 2010 को प्रकाशित) पुस्तक: अकथ कहानी प्रेम की- कबीर की कविता और उनका समय लेखक: प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन मूल्य: 500… Continue reading

Censor Board denies certificate to “Flames of the Snow”

Board says, film justifies Maoist ideology …. Indian Censor Board has refused to certify ‘Flames of the Snow’, a documentary on Nepal, for public screening. The Board feels that the film ‘tells about… Continue reading

बहसतलब (दो): मोहल्‍ला लाइव, यात्रा बुक्‍स और जनतंत्र का आयोजन

दिल्ली में यूँ तो रोज़ाना अनेक गोष्ठियां अनेक विषयों पर होती रहती हैं, लेकिन ऐसी गोष्ठियां कभी-कभार ही होती हैं जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी, विशेषज्ञ, पेशेवर, कार्यकर्ता आदि एक साथ किसी एक… Continue reading

सार्कोज़ी, ज़रदारी, दलाली और आतंक

प्रकाश के रे बरगद के संपादक है. प्रसिद्ध अमरीकी साहित्यकार नैथनियल हव्थोर्न ने लिखा था कि गुज़रा हुआ समय वर्तमान के ऊपर किसी मृत दानव के शरीर की तरह पड़ा होता है. इस बात… Continue reading