Category Archive: Cinema etc.

Dreaming, scheming, never growing old: remembering Abbas Kiarostami (1940 – 2016)

I didn’t grow up with Kiarostami’s films. I discovered Abbas Kiarostami long after he’d become Kiarostami, during the same time that I began devouring everything having to do with Iranian culture. I vaguely remember visiting the Film Museum off of Vali-ye Asr Avenue in Tehran with my friend one hot summer’s day, when I was around 16 years old. I had no idea who the man in the sunglasses was, only that he was of significance where Iranian cinema was concerned.

एक मुखरता का मौन होना

बंगाल के सांस्कृतिक इतिहास में ऐसे अनेक व्यक्ति हुए हैं, जिन्होंने न सिर्फ उस इलाके के, बल्कि पूरे देश की चेतना पर गहरा असर डाला है. महाश्वेता देवी इस सिलसिले का संभवतः अंतिम नाम है.

जिंदगी की जुस्तजू में प्रेम का दीप ‘कोशिश’

सक्रिय समाज के बीच हरि-आरती जैसे लोग अजनबी महसूस करते होंगे. हरि समान लोगों के लिए सामान्य जिंदगी गुजर करना बड़ा मुश्किल है. कोशिश अपनी राह में उन सभी चुनौतियों का डटकर सामना करती नजर आती है. संजय लीला भंसाली की ‘खामोशी’ के लिए रेफेरेन्स प्वाइंट यही फिल्म रही होगी. कोशिश का उद्देश्य अक्षम लोगों की दिक्कतों को दिखाना-भर नहीं था, बल्कि हरि -आरती के उदाहरण के जरिए हिम्मत-हौसले व प्रेम की विजय को दिखाना था.

मराठी सिनेमा से जगतीं उम्मीदें

मुंबई फिल्म उद्योग में भी बीते सालों में प्रयोगधर्मिता का सिलसिला शुरू हुआ है तथा दक्षिण से भी कुछ उम्दा फिल्में आई हैं, पर उनका मुख्य स्वर अब भी मुनाफे और सतही मनोरंजन को ही संबोधित है. इन इलाकों में फिल्मों से जुड़े लोग मराठी से सीख रहे हैं और उन्हें सीखना भी चाहिए. इतिहास में ऐसे अवसर बार-बार नहीं आते हैं, जब कलात्मक निराशा के दौर में उम्मीद की बिजलियां लगातार चमकती हों.

The Silent Indian National Anthem

On the occasion of India’s 61st Republic Day in 2011, this silent rendition of India’s National Anthem, interpreted through the sign language and gestures, was created by the Mudra Group.

A brief history of Iranian cinema, from Haji Agha to Agha Farhad

To best understand the roots of Iranian cinema, one must perhaps travel back to the early 20th century, when the Qajar monarch Mozaffareddin Shah was shown cinematographic footage during a visit to France.

The forgotten stanzas of Jana, Gana, Mana

India’s national anthem is only one of the five stanzas, composed and penned by Rabindranath Tagore. The remaining four stanzas can be heard here. This video is from a Bangla film Rajkahini (Srijit… Continue reading

हम लड़ेंगे साथी… उदास मौसम के ख़िलाफ़…

We shall fight, comrade, for the unhappy times
We shall fight, comrade, for the bottled-up desires
We shall gather up, comrade, the fragments of our lives

विद्रोहीः एक कवि, एक रेबेल, एक ड्रॉपआउट!

निश्चय ही वे उस रूप में जन-कवि वगैरह नहीं थे जिस रूप में हमें अब तक जन-कवियों के बारे में बताया-दिखाया-समझाया गया है. उनकी कविता में जन थे और कविता की दिशा उधर ही थी जिधर नागार्जुन, गिर्दा, और गोरख जैसों की थी. हाँ, उनकी कविता का मिजाज अलग था. इतने विराट बिम्ब गोरख, नागार्जुन किसी के पास न थे. पर न वे बाबा की तरह ‘दुनियावी’ थे, न गोरख की तरह गेय, न ही खेत-मजदूरों के जीवन-संघर्ष में पूरी तरह उतरे हुए.

कहो जी तुम क्या क्या खरीदोगे…

दुनिया के ‘संगतखाने’ के बेशुमार मकामों में से एक चतुर्भुज स्थान, जो ‘हर चाहनेवाले का दिलचाहा’ है, के किस्सों को ‘कोठागोई’ में संजोते हुए प्रभात रंजन ने अनेक कोठों और कोठियों की चौखट लांघी है, और उन्हें लिखते हुए वे विधाओं की चौखटों की परवाह भी नहीं करते. बारह किस्सों की यह किताब किस्सा तो है ही, वह इतिहास, समाजशास्त्रीय अध्ययन और सांस्कृतिक रिपोर्ट भी है.

Yet another open letter! To Bhakts, trolls and faux nationalists

I do not have a direct pipeline to God, but I promise, I will pray for your speedy mental recovery and ask him to finally give you what makes us human – a mind and a heart, for you to discover those alien things called thoughts and emotions, that can lead you to feeling empathy for fellow humans.