भोजपुरी फिल्म फेस्टिवल : अपने ही जाल में उलझा भोजपुरी सिनेमा

प्रकाश के रे बरगद के संपादक हैं.

bhojpuri-4प्रख्यात फिल्मकार मार्टिन स्कॉर्सेसी के मुताबिक, सिनेमा का मतलब उसके फ्रेम के भीतर और बाहर की चीजों से तय होता है. जाने-माने गीतकार-लेखक जावेद अख्तर कहते हैं कि सिनेमा के जरिये हम देश की आधुनिक इतिहास-यात्रा को रेखांकित कर सकते हैं.

दिल्ली में आयोजित भोजपुरी फिल्म फेस्टिवल के आयोजन के संदर्भ में ये दोनों बातें बार-बार मेरे जेहन में आती रहीं. फेस्टिवल में प्रदर्शित दस फिल्मों के सहारे भोजपुरी सिनेमा के इतिहास को तो देखा ही जा सकता है, इन फिल्मों में भोजपुरी समाज के वैचारिक और मनोवैज्ञानिक उलझनों को भी पढ़ा जा सकता है.

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