एक पाती अमेरिका के नाम

हेलो अमेरिका,

आपके नये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शपथ-ग्रहण के अवसर पर आपको बधाईयाँ और शुभकामनायें. अमेरिका का राष्ट्रपति सिर्फ़ अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बहुत मायने रखता है. ऐसे में उसके साथ ग़ैर-अमेरिकी दुनिया की भी भावनायें, आकाँक्षायें और शंकायें जुड़ी होती हैं. आपके देश में और धरती के अन्य हिस्सों में ट्रंप ने अलग-अलग तरह से उम्मीदों और आशंकाओं को नयापन दिया है. बहरहाल, मुझे लैंग्सटन ह्यूगस की कविताएँ- I, Too, Sing America और LeT America Be America Again याद आ रही हैं. कई दशक पहले लिखी गयीं ये कविताएँ अगर आज प्रासंगिक लग रही हैं, तो इसका मतलब यह भी है कि ट्रंप को लेकर जो डर या चिंताएँ हैं, वे नयी नहीं हैं. ह्यूगस ने लिखा है-

Let America be America again.
Let it be the dream it used to be.
Let it be the pioneer on the plain
Seeking a home where he himself is free.

(America never was America to me.)

मुझे लगता है कि आज कुछ देर के लिए ट्रंप, ओबामा, क्लिंटन, सांडर्स, बुश, रीगन या फिर इवांका, स्ट्रीप या फिर रूस, चीन, विकीलीक्स आदि से ध्यान हटा कर अमेरिका के मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक संकट पर सोचा जाना चाहिए. अगर यह सुझाव स्पॉ्यलिंग द पार्टी या डिस्टर्बिंग द मिलांकोली है, तो इसे बाद में भी अंजाम दिया जा सकता है. अमेरिका के मौजूदा संकट का सबसे सीधा उदाहरण ओबामा का नोबेल शांति पुरस्कार है. आपको याद होगा कि यह सम्मान उन्हें अपने चुनाव अभियान के दौरान इराक़ से सेना हटाने और अमेरिका के वंचितों को न्याय दिलाने के वादे से पैदा हुए ‘होप’ की वज़ह से दिया गया था. अब देखिये, बाद में उन्होंने क्या किया या नहीं किया, उसे छोड़ दें. आज उनका आख़िरी दिन है बतौर राष्ट्रपति. उस पर चर्चा बाद में की जायेगी. उनके अभियान पर आते हैं. एक व्यक्ति, जिसकी राजनीति में कुछ भी भरोसेमंद नहीं था, वह सिर्फ़ गूडी-गूडी बात कह कर न केवल अमेरिका के आम लोगों का, बल्कि नोबेल कमेटी के धुरंधरों को भी मोह सकता था. क्या यही यह बताने के लिए बहुत नहीं है कि अमेरिका को किसी भले मनोवैज्ञानिक काउंसेलर की ज़रूरत है, जो जीवन और शासन में आस्था को बहाल करने के लिए लोगों से प्यार-दुलार से बात करे. उन्हें सांत्वना दे. ढाँढस बँधाये. आ चल के तूझे मैं लेके चलूँ, एक ऐसे गगन के तले…

ओबामा ने वही किया था. पर, कोई हीलर या प्रीचर सही सीज़र तो हो नहीं सकता. सो, वह रोग और बढ़ गया. नतीज़ा- ट्रंप और हिलेरी. इसलिए, अमेरिका, न्यूयॉर्क टाइम्स के थके हुए उदास कॉलमनिस्टों और फ़ॉक्स के उज्जड प्रेज़ेंटरों के मोहपाश से कुछ देर के लिए बाहर निकलने की ज़रूरत है.

O, yes,
I say it plain,
America never was America to me,
And yet I swear this oath–
America will be!  

आप सोचिये, एक तरफ़ आपका राष्ट्रपति,चाहे वह कोई भी हो, शांति की बड़ी-बड़ी बातें करता है, और दूसरी तरफ़ दुनिया के कोने-कोने में अपने सैनिक, हथियार और परमाणु मिसाइल भेजता है. दियेगो गार्सिया गूगल कीजियेगा. मैं जहाँ से यह सब लिख रहा हूँ, वहाँ से आपके देश की दूरी हज़ारों किलोमीटर है, पर हिंद और प्रशांत महासागरों में घूमते आपके नौसैनिक पोतों से मिनटों के भीतर मेरे ऊपर परमाणु बम गिराया जा सकता है, आप ड्रोन भेज कर मुझे मार सकते हैं. आपके कमांडर-इन-चीफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान, यमन और पाकिस्तान में निर्दोष लोगों पर बम गिराया है, ड्रोन से गोली चलायी है. स्कूलों, अस्पतालों और बारातों पर हमले किये गये हैं. जब वैसे राष्ट्रपति अपने बच्चों-बीवी को लेकर भावनात्मक बातें बोलते हैं, तो आप भी भावनाओं में बहे जाते हैं. गूगल कीजियेगा, उन बच्चों, माँओं और परिवारों के बारे में जिनकी मौत ईश्वर ने नहीं, ओवल ऑफ़िस के वेस्ट विंग से तय की जाती हैं. आप सबसे ज़्यादा खानेवाले देश हैं, आप सबसे ज़्यादा खाना बरबाद करनेवाले देश हैं, आप वह देश हैं, जो अनाज और फल-सब्ज़ियों के दाम को नियंत्रित करने के लिए ऊपज को समुद्र में फेंक देता है. दुनिया की लूट में आपको भी हिस्सा मिलता है. सस्ता लोन, सस्ता इएमआइ. आपको मज़ा आता है बड़ी-बड़ी बातों में. आप दुनिया के सबसे मोटे लोग हैं. आप मनोचिकित्सकों के पास जानेवाले सबसे बड़े देश भी हैं. जब आपके स्कूल में या मॉल में गोली चलती है, तो आप गन कल्चर पर बहस करते हैं, लेकिन आपका चहेता राष्ट्रपति दुनियाभर में जनसंहार के सामान बेचता है, उसे आप आर्थिक विकास, वाणिज्य और कूटनीति कहते हैं. इधर आपने नया शगल पाला हुआ है कि रूस ने चुनाव में दख़ल दी है. सच इसके उलट है. येल्त्सिन और पुतिन को रूस पर कब्ज़ा कराने में आपके देश का बड़ा हाथ रहा है. अभी आपके एक ज्ञानी चॉम्स्की ने बताया है कि दुनिया के कई देशों के लोकतांत्रिक चुनावों में अमेरिका बेज़ा नाक घुसेड़ता रहता है. तख़्ता पलट और रिजिम चेंज तो आपकी नीति का ही हिस्सा है.

पर, आप स्वीकार नहीं करेंगे यह सब. पर, सच यह है कि आप बीमार हैं. आपकी चिंता में क्लिंटन का सिगार, ट्रंप की ग्रैबिंग और लेडी गागा का ड्रेस होता है. आपकी चिंता में आप ही नहीं हैं क्योंकि आपको दो शिफ़्ट में काम करना होता है, घंटों कम्यूट करना होता है, बेनेफिट के लिए लाइन में लगना होता है. ऐसे में आप सत्ता के मेलोड्रामा से मनोरंजन चूसते हैं. इसलिए ट्रंप पर आपकी चिंता या ख़ुशी भी ऐसे ही खोखली हैं. कभी अवसर मिले, तो मनोवैज्ञानिक विल्हेम रीख़ की Listen, Little Man पढ़ियेगा. बीस पन्ने का परचा है.    

ख़ैर, जो गति तोरी, सो गति मोरी. इधर भी हाल बेहाल है. जब मैं आपको यह सब लिख रहा हूँ, तो इसका एक पता मैं भी हूँ. थोड़ा लिखा, ज़्यादा समझना. मिलते ही ख़त लिखना.

I, too, sing America.

I am the darker brother.
They send me to eat in the kitchen
When company comes,
But I laugh,
And eat well,
And grow strong.

Tomorrow,
I’ll be at the table
When company comes.
Nobody’ll dare
Say to me,
“Eat in the kitchen,”
Then.

Besides,
They’ll see how beautiful I am
And be ashamed–

I, too, am America.

आपका,
प्रकाश के रे

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