सउदी अरब तथा अन्य खाड़ी देशों के प्रति मोदी सरकार का ढुलमुल रवैया क्यों?

स्वामी अग्निवेश व सांसद अली अनवर द्वारा प्रेस वक्तव्य

सऊदी अरब द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिलना एक व्यापारिक समझौता माना जाए क्योंकि उसके एवज में वह सऊदी तथा अन्य खाड़ी देशों को हमारे नागरिकों से, जो वहां रोजगार पर है, के प्रति मनमाना व्यवहार की छूट प्रदान कर दिया है। हमारी सरकार दस हजार कामगारों को सऊदी में भोजन मुहैया करा रही है और उनकी न्यूनतम मजदूरी अदा करवाये बिना उन्हे घर वापस भारत लाने की बात की जा रही है। आखिर क्यों नहीं मोदी सरकार सऊदी राजदूत को तलब कर अपना पक्ष स्पष्टता से रखती है और वहां फंसे भारतीयों के भोजन व मजदूरी दिलाने की जिम्मेदारी सऊदी सरकार पर क्यों नहीं डाल रही? मोदी सरकार द्वारा न सिर्फ उनका बकाया वेतन दिलवाने का दबाव बनाया जाना चाहिए, बल्कि शारीरिक व मानसिक शोषण के एवज में भारी हरजाने की मांग भी सउदी सरकार से करनी चाहिए। किंतु सऊदी सरकार को जिम्मेदार ठहराने के बजाय जेद्दा में भारतीय सरकार ने अपने राजदूत को भूख से पीड़ित भारतीय नागरिकों की मदद का आदेश दे दिया और अपने संसाधनों से उनको सकुशल वापस लाने के लिए मंत्री वीके सिंह को जिम्मेदारी सौंपी।

05

स्वामी अग्निवेश व सांसद अली अनवर (फोटो- राजेश कुमार)

भारत सरकार के अनुसार तेल सम्पदा के धनी देशों सऊदी अरब, ओमान, कतर, बहरीन आदि में 70 लाख से अधिक भारतीय कार्यरत है। अमेरिका व अन्य देशों में कार्यरत मजदूरों की अपेक्षा 10 गुना से भी अधिक मौत के जोखिम के साथ वे काम कर रहे हैं। खाड़ी देशों में 50 प्रतिशत तापमान पर भारतीय कार्य करने को विवश है। विनिर्माण क्षेत्र में इनकी स्थिति और दयनीय है। मजदूर टीन के बने घरों में रहने को विवश है। ऐसे देश में जहां अधिकतर कारीगर एसी में काम कर रहे है, वहां हमारे नागरिक सर्वाधिक अस्वास्थ्यकर अमानवीय परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किये जा रहे है। मानों ये मजदूर नहीं गुलाम हो।

प्रधानमंत्री मोदी को जिन्होंने खाड़ी देशों में यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री होने को ट्वीट कर देश को बताया था। उन्हें याद रखना चाहिए देश आपकी सऊदी शाहों के साथ सेल्फी, मस्जिद यात्रा व नागरिक सम्मान के तस्वीरों से खुश होने वाला नहीं आपने वहां भारतीय मजदूरों के संग खाना खाया था, किन्तु आज वो खाने को मोहताज है, पीने के पानी नहीं है और आप अपने शाही दोस्त से शिकायत तक नहीं कर पा रहे हैं। यह समझ से परे है। आपको मंदिर के लिए भूमि प्राप्त करने अथवा सेल्फी से अधिक वहां कार्यरत भारतीयों की बेहतरी को प्राथमिकता देनी चाहिए थी जो इस घटना से लगता है कि आपने नहीं किया है।

अभी हाल ही में मुझे कुवैत, बहरीन, दोहा आदि जाने का अवसर मिला। मेरे भारतीय साथियों ने बताया कि किस तरह भारतीय महिलाओं को यहां यौनदासी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसी महिलाएं विशेष तौर से आंध्रप्रदेश व केरल प्रदेश से अरब शेखों की अय्याशी के लिए लायी जाती हैं। कुवैत में रह रहे भारतीय राजदूत और वहां के एक मंत्री ने मुझे बताया कि इस तरह के शिकायत मिलने के बाद कुवैत सरकार ने घरेलू सहायिका हेतु भारतीय महिलाओं को लाने की मनाही कर दी किन्तु अन्य खाड़ी देशों में स्थिति अभी भी भयानक बनी हुई है।

सऊदी राजनायिक एवं उसके साथियों द्वारा नेपाली महिला के सामूहिक बलात्कार मामले में उचित कार्रवाई न करने का मैं प्रधानमंत्री मोदी को दोषी मानता हूं। इन्होंने वियना कन्वेंशन का बेजा इस्तेमाल कर सउदी राजनायिक को आपराधिक कार्यवाही से छूट प्रदान कर देश के संविधान का अपमान करने का कार्य किया था।

मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निवेदन करता हूं कि एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करें जिसमें मानव अधिकार कमीशन, ट्रेड यूनियन व सामाजिक कार्यकर्ता आदि शामिल हों जिन्हें वहां की जमीनी हकीकत को जानने व उस पर रिपोर्ट देने का अधिकार दिया जाए। जिससे 70 लाख भारतीयों के अधिकारों की अन्तरराष्ट्रीय श्रम कानून के तहत रक्षा की जा सके।

Advertisements