माल्या को माल देने वालों पर कार्रवाई कब?

मोहन गुरुस्वामी दिल्ली स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी ऑल्टरनेटिव्स के संस्थापक अध्यक्ष तथा केंद्रीय वित्त मंत्रालय के पूर्व सलाहकार हैं. उनसे mohanguru[at]gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है.

हमारे कारोबारी समूहों से पैसे की धार राजनीतिक समूहों की तरफ बह रही है. इनमें मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के अलावा बस्तर के नक्सलवादी और असम के उल्फा उग्रवादी तक शामिल हैं. हमारे यहां कई उद्यमी हैं जो उद्यम कम करते हैं और जिनके पास मौजूद ज्यादातर पैसा सार्वजनिक बैंकों का है. सवाल यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस प्रक्रिया को रोकने की कोशिश क्यों नहीं करता. कंपनी मामलों का विभाग चुप क्यों है? अरुण जेटली का मौन समझ में आ सका है, लेकिन रघुराम राजन को बैंकों की नकेल खींचने में क्यों हिचक हो रही है?

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