ब्राजीलः लूला हीरो या विलेन!

ब्रह्मानंद मिश्र एक पत्रकार हैं. इनसे brahmanand2008@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है.

लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा लैटिन अमेरिकी राजनीति का एक ऐसा चर्चित नाम, जिसने न केवल ब्राजील की प्रोफाइल को अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहुंचाया बल्कि देश की आर्थिक विकास की रफ्तार को दशकों तक बरकरार रखा. लूला लगभग आधी शताब्दी लंबे राजनीति कैरियर में जनवरी, 2003 में पहले वामपंथी नेता के रूप में राष्ट्रपति पद पर दाखिल हुए थे. लूला ने पहले कार्यकाल में आर्थिक विकास, समाजिक सुधार और भ्रष्टाचार को खत्म करने का लक्ष्य बनाया. यह उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और निर्णय का नतीजा था कि उनके पहले कार्यकाल के अंत तक ब्राजील की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही थी और गरीबी दर में काफी गिरावट आ चुकी थी. लाखों ब्राजीली जनता को इस आर्थिक और सामाजिक सुधार का सीधा लाभ मिला और इससे लूला की लोकप्रियता का ग्राफ लगातार बढ़ता रहा. बाद के दिनों में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरने के बाद लूला की साख को बट्टा लगा. उनके ऊपर सरकार द्वारा संचालित तेल कंपनी पेट्रोब्रास की अनियमितताओं में शामिल होने का आरोप लगाया गया.

brazil instability (1)

दुश्वारियों में शुरू हुई जिंदगी
बेहद गरीब और अशिक्षित परिवार में जन्मे लूला की जिंदगी का शुरुआती दौर बेहद दुश्वारियों भरा था. परिवार का खर्च चलाने के लिए बचपन में जूते पॉलिश करने, गलियों में फेरी लगाने जैसे काम करने पड़े. साओ पाउलो के निकट औद्योगिक शहर साओ बर्नार्डो द कैंपो में मेटल वर्कर के रूप में उन्होंने काम शुरू किया. यह ऐसा दौर था, जब ब्राजील की अर्थव्यवस्था मंदी से गुजर रही थी, इसके कुछ ही साल बाद 1964 में सैन्य तख्तापलट होने हो जाने से अस्थिरता का भी दौर चला. वर्ष 1969 में हेपेटाइटिस से पत्नी की मौत हो जाने के बाद लूला ट्रेड यूनियन में पूरी सक्रियता के साथ शामिल हो गये. ट्रेड यूनियन को अपना पूरा समय देने और सक्रियता को बढ़ाने के लिए उन्होंने फैक्ट्री छोड़ दी और वर्ष 1975 में वह यूनियन अध्यक्ष चुने गये.

यूनियन से वर्कर्स पार्टी की रखी नींव
1975 में एक लाख से अधिक मेटल वर्कर्स के नेता बनने के बाद लूला ने यूनियन की दिशा ही बदल दी. अब लूला ने मजदूरों के वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ दिया और सैन्य शासन के आर्थिक नीति के खिलाफ खुलकर खड़े हो गये. देशभर में धरना-प्रदर्शन का दौर चला. लूला को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून तोड़ने के आरोप में गिरफ्तार कर साढ़े तीन साल के लिए जेल भेज दिया गया. जेल से बाहर आने के बाद लूला ने ट्रेड यूनियन के नेताओं, बुद्धजीवियों और चर्च एक्टिविस्टों की मदद से 1980 में ‘वर्कर्स पार्टी (पीटी)’ की नींव रखी. यह ब्राजील के इतिहास में पहली सबसे बड़ी सोशलिस्ट पार्टी थी. धीरे-धीरे पार्टी अपने सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य तक पहुंचने में कामयाबी हुई. लूला को पहली बड़ी राजनीतिक कामयाबी 1986 में मिली, जब साओ पाउलो से फेडरल डिप्टी के तौर पर नेशनल चैंबर ऑफ डेप्युटीज के लिए चुने गये.

सत्ता में आने के बाद प्रदर्शन
2002 में चुनावी जीत से पहले लूला तीन बार हार का सामना कर चुके थे. धीरे-धीरे उनको यह भरोसा हो चला था कि बिना राजनीतिक गंठबंधन के सत्ता में आ पाना मुश्किल है. 2002 में चुनावों में उन्होंने बिजनेस लीडरों को जोड़ा और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ काम करने का वादा किया. ब्राजील के राष्ट्रपति के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद लूला ने सामाजिक कार्यक्रमों और फैली असमानता को दूर करने के लिए करोड़ों डॉलर की योजनाएं तैयारी की. गरीबी दूर करने के लिए न्यूनतम मजदूरी की सीमा को बढ़ाया और ‘बोल्सा फेमिलिया’ नाम के सुधार कार्यक्रम के तहत 44 मिलियन परिवारों तक सरकारी मदद पहुंचायी. हालांकि, कुछ लोगों के अनुसार संरचनागत अव्यवस्था के कारण यह कार्यक्रम अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका. आर्थिक सुधारों के बावजूद कुछ लोगों ने इस तर्क आधार पर आलोचना की, कि अपने प्रतिद्वंदी देशों के मुकाबले यह संतोषजनक नहीं थी.

लूला के समर्थकों की उम्मीदें कम नहीं हुई हैं. लोग एक बार फिर से लूला को राष्ट्रपति के तौर पर देखने का ख्वाब पाले हुए हैं. बहरहाल, ब्राजील पिछले 25 सालों के सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है. पेट्रोब्रास के करोड़ों डॉलर के भ्रष्टाचार के मामले सामने आने के बाद बड़ी संख्या में बिजनेस मैन, राजनेता या तो गिरफ्तार किये जा चुके या जांच के दायरे में आ चुके हैं.

13 मार्च, 2016 को प्रभात खबर में प्रकाशित

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