आम-केला संवाद

सुशील झा बी बी सी में कार्यरत हैं. उनकी शिक्षा जादूगोड़ा (झारखण्ड), जे एन यू और IIMC, दिल्ली में हुई. उनसे sushilkumar.jha@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है.

सुशील झा

आम- सर, क्या मैं सपना देख सकता हूं.

केला- नहीं, सपना सिर्फ केला देख सकता है, आम नहीं.

आम- लेकिन सर, मार्टिन लूथर किंग ने भी सपना देखा था.

केला- हां देखा होगा लेकिन वो अमरीका था जहां लोग सपना देख सकते हैं और पूरा भी कर सकते हैं. लेकिन केला गणराज्य में सपना सिर्फ केला देखेगा.

आम- लेकिन सर, मैंने तो सपना देख लिया.

केला- जो तुमने देखा है वो सपना नहीं उम्मीद है…उम्मीद …

आम- वो ओबामा वाली उम्मीद.

केला- बिल्कुल सही पहचाना तुमने. ओबामा ने उम्मीद की और फिर उम्मीद को बेचा जैसे अमरीका बर्गर बेचता है…..केंचुकी फ्राइड चिकन बेचता है वैसे ही ओबामा ने उम्मीद को बेचा. तुमने भी वो उम्मीद खरीदी है अब उम्मीद करते रहो और उम्मीद को सपना समझते रहो.

आम- अरे फिर मेरी उम्मीद या सपना कैसे पूरा होगा…..

केला- आम लोगों की भाषा में एक कहावत है जो केलों पर लागू नहीं होती कि..उम्मीद पर दुनिया कायम है..तुम्हारी उम्मीद पर तुम्हारी दुनिया चलती रहेगी. तुम कभी केला नहीं बन सकोगे क्योंकि तुम्हारी उम्मीद या सपना केला बनने की है.

आम- तो सर आप कोई उपाय बताइए..मैं आम आदमी कैसे केला बन सकूंगा.

केला- तो सुनो, एक समय में मैं भी आम था. मैंने भी सपना देखा….लेकिन मेरा सपना अमरीका जाने का था. मेरे बाप दादा केलों से जुड़े हुए आम थे. मैं अमरीका चला गया. वहां की यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की और जब वापस लौटा तो केला गणराज्य में मुझे केला मान लिया गया. अब मैं केला हूं और ठाठ से रहता हूं.

आम- तो इसका मतलब मेरा कुछ हो नहीं सकता क्योंकि मेरे तो बाप दादा भी केलों से कभी जुड़े नहीं रहे.

केला- इसका तो मैं कुछ नहीं कर सकता. तुम आम हो तुम्हारी नियति है चूसा जाना. तुम मीठे हो गूदेदार हो. तुम्हारी गुठलियों से तुम्हारे जैसे और पैदा हो जाएंगे. मैं केला हूं मेरी कोई गुठली नहीं ताकि हम जैसे कम रहें और हां हमारा छिलका भी काम का है. जब तुम कभी हमें परेशान करते हो तो हम अपना छिलका तुम्हें देते हैं जिस पर तुम फिसल कर फिर अपनी औकात में पहुंच जाते हो.

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