Category Archive: Cinema etc.

हम लड़ेंगे साथी… उदास मौसम के ख़िलाफ़…

We shall fight, comrade, for the unhappy times
We shall fight, comrade, for the bottled-up desires
We shall gather up, comrade, the fragments of our lives

विद्रोहीः एक कवि, एक रेबेल, एक ड्रॉपआउट!

निश्चय ही वे उस रूप में जन-कवि वगैरह नहीं थे जिस रूप में हमें अब तक जन-कवियों के बारे में बताया-दिखाया-समझाया गया है. उनकी कविता में जन थे और कविता की दिशा उधर ही थी जिधर नागार्जुन, गिर्दा, और गोरख जैसों की थी. हाँ, उनकी कविता का मिजाज अलग था. इतने विराट बिम्ब गोरख, नागार्जुन किसी के पास न थे. पर न वे बाबा की तरह ‘दुनियावी’ थे, न गोरख की तरह गेय, न ही खेत-मजदूरों के जीवन-संघर्ष में पूरी तरह उतरे हुए.

कहो जी तुम क्या क्या खरीदोगे…

दुनिया के ‘संगतखाने’ के बेशुमार मकामों में से एक चतुर्भुज स्थान, जो ‘हर चाहनेवाले का दिलचाहा’ है, के किस्सों को ‘कोठागोई’ में संजोते हुए प्रभात रंजन ने अनेक कोठों और कोठियों की चौखट लांघी है, और उन्हें लिखते हुए वे विधाओं की चौखटों की परवाह भी नहीं करते. बारह किस्सों की यह किताब किस्सा तो है ही, वह इतिहास, समाजशास्त्रीय अध्ययन और सांस्कृतिक रिपोर्ट भी है.

Yet another open letter! To Bhakts, trolls and faux nationalists

I do not have a direct pipeline to God, but I promise, I will pray for your speedy mental recovery and ask him to finally give you what makes us human – a mind and a heart, for you to discover those alien things called thoughts and emotions, that can lead you to feeling empathy for fellow humans.

भाजपा के ‘फ़्लॉप’ सितारे

अनुपम जी यह बात नहीं बताना चाहते हैं. उन्हें यह बताना चाहिए कि बिहारी सिनेमा-टीवी के घोर उपभोक्ता हैं और भाजपा के दर्जन भर से अधिक केंद्रीय मंत्री और आस-पड़ोस के राज्यों के दिग्गज बिहार में कई सप्ताह से जमे हुए हैं. और, यह कि इसके बावज़ूद पार्टी का प्रचार ढीला है. इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए, न कि कुछ रुपयों के लिए प्रचार करने आये सिने-कलाकारों की असफलता के रूप में.

AN OPEN LETTER TO FELLOW WRITERS from Rahman Abbas

The social and political scenario of our beloved country is worsening with every passing day. Right wing forces have polarized nation in the name of religion, caste and ethnicity for political gains. Dissent is systematically crushed and rational thinkers and writers are threatened and brutally killed in broad daylight.

Bajrangi: Not A Review

It’s a belief in innocence. It’s a cry for turning the clock back. It’s a want for getting back to your roots. There would be a million eyes across the North who yearn to go and see that wooden door through which their childhood flew into manhood overnight.

शोले के बहाने

सिनेमा को समाज के दर्पण के रूप में पढ़ा जाए या नेशनल अलेगोरी के रूप में? दर्शक भरत मुनि का रसिक है या चार्ली चैप्लिन का इग्नोरैंट फ़ेलो? वह घटक का प्रोजेक्शन है या रे का प्रोजेक्ट? वह मोंटाज का उपभोक्ता है या लाइट एंड साउंड का भुक्तभोगी? वह अवंतिका का रेपिस्ट है या बजरंगी के लिए दुआगो?

Learning Hindi in Paris

The world turned azure, and amidst boozy banter and the ruffling of denim, you were there, alone, bidding the night farewell.

Keshav Lal and Soni Bai Waghini

Keshav Lal has worked with legendary composers such as Laxmikant Pyarelal and makers like V. Shantaram . Fate bought him to streets of Pune where he lived with his wife and together they… Continue reading

‘Film industry people are indulging in wrong doings and harassment!’

Monisha Kanwar interviews Filmmaker Dilip K Mukharaiya on his upcoming film Pareshaanpur… How did the idea of Pareshaanpur originate? The idea of Pareshaanpur came as a routine subject, I always looking for a… Continue reading