Category Archive: Art

हम लड़ेंगे साथी… उदास मौसम के ख़िलाफ़…

We shall fight, comrade, for the unhappy times
We shall fight, comrade, for the bottled-up desires
We shall gather up, comrade, the fragments of our lives

विद्रोहीः एक कवि, एक रेबेल, एक ड्रॉपआउट!

निश्चय ही वे उस रूप में जन-कवि वगैरह नहीं थे जिस रूप में हमें अब तक जन-कवियों के बारे में बताया-दिखाया-समझाया गया है. उनकी कविता में जन थे और कविता की दिशा उधर ही थी जिधर नागार्जुन, गिर्दा, और गोरख जैसों की थी. हाँ, उनकी कविता का मिजाज अलग था. इतने विराट बिम्ब गोरख, नागार्जुन किसी के पास न थे. पर न वे बाबा की तरह ‘दुनियावी’ थे, न गोरख की तरह गेय, न ही खेत-मजदूरों के जीवन-संघर्ष में पूरी तरह उतरे हुए.

THE BEATLES – DEHRA DUN

The Beatles spent some time here in 1968. They composed a number of songs while they were here, even one on Dehradun, which never formed part of an album, but now is available on youtube. The lyrics are ‘Dehra Dehra Dun, Dehra Dun Dun/ Dehra Dehra Dun/Dehra Dun Dun/ Many Roads can take you there /Many different ways/one direction takes you weeks/ another takes you days/ many people on the roads /looking at the sights/ Many others with their troubles/looking for their rights/see them move along the roads/in search of a life divine /beggars in a gold mine …Dehra Dehra Dun /Dehra Dun Dun”.

ये विद्रोही भी क्या तगड़ा कवि था…

नाम है-रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’। ज़िला सुल्‍तानपुर के मूल निवासी। नाटा कद, दुबली काठी, सांवला रंग, उम्र लगभग 50 के आसपास, चेहरा शरीर के अनुपात में थोड़ा बड़ा और तिकोना, जिसे पूरा हिला-हिलाकर वे जब बात करते हैं, तो नज़र कहीं और जमा पाना मुश्किल होता है। विद्रोही फक्कड़ और फटेहाल रहते हैं , लेकिन आत्मकरुणा का लेशमात्र भी नहीं है, कहीं से। बड़े गर्व के साथ अपनी एक कविता में घोषणा करते हैं कि उनका पेशा है कविता बनाना…

भाजपा के ‘फ़्लॉप’ सितारे

अनुपम जी यह बात नहीं बताना चाहते हैं. उन्हें यह बताना चाहिए कि बिहारी सिनेमा-टीवी के घोर उपभोक्ता हैं और भाजपा के दर्जन भर से अधिक केंद्रीय मंत्री और आस-पड़ोस के राज्यों के दिग्गज बिहार में कई सप्ताह से जमे हुए हैं. और, यह कि इसके बावज़ूद पार्टी का प्रचार ढीला है. इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए, न कि कुछ रुपयों के लिए प्रचार करने आये सिने-कलाकारों की असफलता के रूप में.

AN OPEN LETTER TO FELLOW WRITERS from Rahman Abbas

The social and political scenario of our beloved country is worsening with every passing day. Right wing forces have polarized nation in the name of religion, caste and ethnicity for political gains. Dissent is systematically crushed and rational thinkers and writers are threatened and brutally killed in broad daylight.

Bajrangi: Not A Review

It’s a belief in innocence. It’s a cry for turning the clock back. It’s a want for getting back to your roots. There would be a million eyes across the North who yearn to go and see that wooden door through which their childhood flew into manhood overnight.

Bharatiya… Hum Bhi Hai… “Jana Gana Mana” sung by Hijras

The idea behind this video is to show that just like Indian men and women, Indian Hijras too have the right to choose an employment which fits their talent, skill and passion.

शोले के बहाने

सिनेमा को समाज के दर्पण के रूप में पढ़ा जाए या नेशनल अलेगोरी के रूप में? दर्शक भरत मुनि का रसिक है या चार्ली चैप्लिन का इग्नोरैंट फ़ेलो? वह घटक का प्रोजेक्शन है या रे का प्रोजेक्ट? वह मोंटाज का उपभोक्ता है या लाइट एंड साउंड का भुक्तभोगी? वह अवंतिका का रेपिस्ट है या बजरंगी के लिए दुआगो?

Earthfall Unmarked

While the tourists complained about the stretch on their way to Yumthang and Zero Point, I got off the vehicle to take a lazy stroll. The signs of the havoc lay barren under the open sky like a war-ridden landscape after the rage.

Learning Hindi in Paris

The world turned azure, and amidst boozy banter and the ruffling of denim, you were there, alone, bidding the night farewell.