आरा में दलित छात्रावासों पर हमले की अनदेखी और जूझते छात्र

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ब्रह्मेश्वर मुखिया अपने ही बनाए चक्रव्यूह का शिकार हुआ है। जिन लोगों पर उंगलियां उठ रही हैं और जो गिरफ्तार किए जा रहे हैं वे सब उसी सामंतवादी चक्रव्यूह के हिस्से हैं। वहीं दलितों-पिछड़ों के लिए भी यह कम महत्वपूर्ण समय नहीं है। इन्हें सामंतवादी ताकतों, सत्ता, प्रशासन और विपक्ष को समझते हुए अपनी भूमिका तय करनी चाहिए।   मुखिया के मारे जाने वाले दिन (1जून को) ही मुखिया समर्थक सामंती ताकतों ने आरा के कतिरा स्थित दलित छात्रावास पर हमला कर आग लगा दिया था। देश भर में आरा शहर का कतिरा मुहल्ला चर्चा में रहा। मीडिया से लेकर सरकार, विपक्ष सबका ध्यान कतिरा स्थित मुखिया के घर पर ही है।मुखिया को लेकर अखबारों ने बकायदा पुलिस के सामानंतर इंवेस्टीगेशन चालू कर रखा था। यहां तक कि उसके भोज में क्या-क्या पकवान बन रहे थे, इस तरह की खबरें सचित्र प्रकाशित हुईं। दूसरी तरफ दलित छात्रों और छात्रावास पर किसी ने ध्यान तक नहीं दिया।
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