मजदूरों ने तालाबंद कारखाने पर कब्जा किया/ Workers occupy locked out mill
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में चल रहे मज़दूर आन्दोलन पर यह ताज़ा रपट संदीप (sandeep.samwad@gmail.com) ने भेजी है:
गोरखपुर के आंदोलनरत मजदरों ने अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने के लिए तालाबंद धागा मिल पर कब्जा कर लिया है। गोरखपुर के मजदूर अपनी मांगों के लिए पिछले कई सप्ताह से आंदोलनरत् हैं। 3 मई को फैक्ट्रीमालिक द्वारा भाड़े पर बुलाए गए गुंडों ने मजदूरों पर गोलियां चला दी थीं जिसके बाद यह आंदोलन और तेज हो गया था। इस गोलीकांड में 19 लोग घायल हुए थे।
पिछले 10 अप्रैल से वी.एन. डायर्स लिमि. के दो कारखानों – कपड़ा मिल और धागा मिल – में तालाबंदी है। कारखाना मालिक ने इन दोनों मिलों के18 मजदूरों को निष्कासित कर दिया था। मजदूर अपने निष्कासित साथियों की बहाली, कारखानों की तालाबंदी खत्म कराने और गोलीकांड की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग कर हैं। कारखानों के मालिक, श्रम विभाग और स्थानीय प्रशासन मजदूरों को थका देने या उनकी एकजुटता को तोड़ने का प्रयास करते रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।पिछले कुछ दिनों से, मालिकान निष्कासित मजदूरों को काम पर रखे बिना मिल चालू कराने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन मजदूरों ने अपने निष्कासित साथियों को काम पर वापस लेने तक काम करने से इंकार कर दिया। कारखाना मालिक नए मजदूरों की भर्ती करके मिल दोबारा चालू करने की धमकी देते रहे हैं।
इस बीच, मजदूरों को आंशिक जीत मिली है। चिलुआताल थान के एसओ गजेंद्र राय का ट्रांसफर हो गया, जो मजदूरों के बर्बर दमन और लाठीचार्ज में शामिल थे। मजदूरों का आरोप है कि श्री राय मालिकों के इशारे पर काम कर रहे थे।
सोमवार को, मजदूरों ने धागा मिल पर कब्जा कर लिया और उसकी सभी शॉप्स कब्जे में ले ली। तभी से वे पुलिस और पीएसी से मिल रही धमकियों के बावजूद कारखाने पर कब्जा किए हुए हैं। इस बीच, बड़ी संख्या में मजदूर कारखाने के बाहर निगरानी कर रहे हैं और अंदर मौजूद मजदूरों तक खाना पहुंचा रहे हैं। संयुक्त मजदूर अधिकार संघर्ष मोर्चा ने कहा है कि जब तक सभी निष्कासित मजदूरों को काम पर वापस नहीं लिया जाएगा और बिना शर्त कारखानों को चालू करने की घोषणा नहीं की जाएगी, तबतक मजदूर कारखाने से बाहर नहीं आएंगे।
इधर, गोरखपुर मजदूर आंदोलन का समर्थन कर रहे एक्टिविस्टों ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को सूचित किया है कि यदि मजदूरों की मांगें नहीं मानी गईं, तो कई ट्रेडयूनियन मिलकर गोरखपुर में एक रैली निकालेंगे। उन्होंने इस आंदोलन को ‘कानून एवं व्यवस्था’ की समस्या के रूप में देखने के लिए राज्य सरकार की निंदा की और आंदोलन के बुनियादी कारणों - गोरखपुर के उद्योगों में श्रम कानूनों का पूरी तरह उल्लंघन है- की पड़ताल करने का अनुरोध किया।
*******************
Latest on the ongoing workers’ movement in Gorakhpur, Uttar Pradesh by Sandeep (sandeep.samwad@gmail.com)



